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Trump Tariffs War: 'चीन को क्यों नहीं दी ऐसी सजा' रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को सुनाई खरी-खरी_我的网站

A | जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य की प्राचीन धरोहरों और मंदिरों को संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी तेज कर दी है।इस संदर्भ में लोक सेवा भवन में उपमुख्यमंत्री प्रभाति परिड़ा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में नई हेरिटेज पॉलिसी लाने और सभी प्राचीन मंदिरों का जियो-टैगिंग करने तथा धरोहर स्थलों के सौंदर्यीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने पर निर्णय लिया गया है।,
75 धरोहर स्थलों से होगी शुरुआत
बैठक में निर्णय लिया गया कि पहले चरण में 75 महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों का सर्वांगीण विकास किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन, संस्कृति और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से काम करेंगे। 3000 से अधिक स्मारकों के लिए टास्क फोर्स राज्य में करीब 3 हजार से ज्यादा धरोहर स्मारक हैं। इनमें से कई उपेक्षित पड़े हैं। इन्हें संरक्षण देने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी।जगन्नाथ संस्कृति और बौद्ध विरासत को प्राथमिकता
बैठक में यह भी तय हुआ कि जगन्नाथ संस्कृति और बौद्ध धरोहरों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सभी प्राचीन मंदिरों का जियो-टैगिंग होगा, ताकि उनकी पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।शक्तिपीठों को जोड़कर बनेगा कॉरिडोर
कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि तारा-तारिणी से लेकर बिरजा पीठ तक सभी शक्तिपीठों को जोड़ते हुए एक हेरिटेज कॉरिडोर बनाया जाएगा। बेहतर सड़क और आधारभूत सुविधाओं से पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन पर खास योजना
भाषा एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन के मौके पर पहले चरण में 75 धरोहर स्थलों के संरक्षण का काम शुरू होगा।。 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत को निशाना बनाने और बड़े खरीदार चीन पर प्रतिबंध नहीं लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है। उनका कहना है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। डेमोक्रेट्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ''बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदने के लिए चीन या अन्य देशों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाकर उसे निशाना बना रहे हैं, जिससे अमेरिकियों को नुकसान पहुंच रहा है और इस प्रक्रिया में अमेरिका-भारत संबंध खराब हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे यह यूक्रेन के बारे में है ही नहीं।'',कमेटी ने न्यूयार्क टाइम्स के एक लेख का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था, ''अगर ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने वाले किसी भी देश पर सेकेंडरी प्रतिबंधों लागू करने का विकल्प चुनता तो एक बात होती। लेकिन केवल भारत पर ध्यान केंद्रित करने के निर्णय के परिणामस्वरूप शायद सबसे भ्रामक नीतिगत परिणाम सामने आए हैं: चीन, जो रूसी ऊर्जा का सबसे बड़ा आयातक है, अभी भी रियायती दरों पर तेल खरीद रहा है, और अब तक वह ऐसी सजा से बचा हुआ है।'',(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) यह भी पढ़ें- सस्ते रूसी तेल से एक साल में भारत के कितने पैसे बचे? ग्लोबल रिसर्च फर्म ने जारी की रिपोर्ट; हैरान कर देंगे आंकड़े。
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Published on:03:46:26
